कागज़ की कश्ती तो डूब गई, पर बारीश अब भी होती हैं...

अन्जान

     क्या खुब लिखी है गजल उन महान गजलकारो ने "यह दौलत भी ले लो, यह शोहरत भी ले लो, या छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी।"

     सचमुच ही आनंद का समाँ मन में बँहा जाता है, मन बंध विभोट हो उठता है उन दिनो को याद कर। फिरसे मन करता है गोता लगाकर आने का उन यादों की झील में और क्यूँ न हो वे  दिन ही ऐसे थे। उन दिनों की सुंदरता में एक अलग ही रहस्य होता है, आए हट एक दृष्य को गहराई से सोंच सकते थे। वह शांत जीवन हमें हमारे गतव्य को सोचने में एक मौसम बना देता  है। आज हर कोई उन दिनो को याद कर फिर से उन हसिन पलो की गोद मे खुद को स्वस्थ महसुस करता है।

     प्रत्येक व्यक्ति जो इन पलों की सुंदरता से अवगत है वह इनके लिए परम प्रेम से मन ही मन कामना करता है कि वे लौट आए। बहुचर्चित वाक्य है, "हमारे जमाने मे क्या दिन थे, आजकल तो वह मजा ही नहीं है।" परंतु क्या केवल कथनी कर मन को दिलासा देना यह सही हल है इस स्थिती का? सभी चाहते है उन दिनो को फिर से जिंदा करना पर बहुत कम लोग अपने विचारों और कथने पर अमल करने अगसर होते है। केवल बार-बार बोलते रहना कि : 'वह दिन कुछ और ही थे!' हमे उन हसिन पलो की सुंदरता से दोबारा नहीं मिला पाएग।

     यह अटल सत्य है कि भुतकाल को पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता और यह भी दुखद सत्य है कि वे दिन भी जैसे के वैसे वापस नहीं आ सकते परंतु एक ऐसी भी चीज है जो इन बंधनो से मुफ्त सर्वोपरी है। जी हाँ वह है यह प्रकृति मेरी समर्थता से लोग प्रसन्न होंगे अपितु कटु सत्य तो यह है कि, मनुष्य को केवल अपनी प्रबलता पसंद है किसी और के विकास से उसे खुशी नहीं ईर्षा होती है। तो क्यों आप इस रास्ते पर जाना चाहते है, जिसपे चलकर कोई मंजिल आने ही नहीं वाली है। क्यों दिखावे के चक्कर मे इस सुंदर मनोरम ऐहसासो से वंचित रह रहे है। मित्रो पुराने दिन फिर से जीए जा सकेत है. बस आपको अपनी सामाजिक छवी को, जी केवल झुठ मात्र है, उसे दुर रखकर प्रकृति के गोद मे स्वयं को बिछाकर कर देना है।

     बीते दिनों को याद कर उन्हें जीना भी संभव है, खेलने वाले मित्र नही पर मैदान तो वहीं है, घुमने के लिए साथ नही पर जंगल, पर्वत, नदियों तो वही है, आँखो पर पट्टी है पर वसंत तो खिलता जा रहा है। आपके पास समय नहीं पर यह ऐहसास तो वही पर है। माना कागज की कश्ती डूब गई पर बारिश अभी भी तो होती है।