बाल होऊ मोह न छुटे...

अन्जान

बाल होऊ मोह न छुटे

साथी तू राह दिखादे...

उगली पकड़ रास्ता काटू

साथी तु राह दिखादे

 

बन बावरा फिरू तितली पकडता

बनु बागी खिलौने के लिए झगडता

कुदू किचडमे बन गेंद कोईसा

देख बादलमे नाचू बारीश मे मोरसा

 

घुमाऊ कश्ती पानीमें गीले बदल

या हवामें उडाऊ जहाज छुता गगन

बनाऊ विशाल किला हातोसे रेतका

या घबराऊ भाईसे सुन जादू टोटका

 

जी चाहे सोऊँ खुन गुणगुण लोरी

जी चाहे भुकसे मारू किलकारी

आधी रात जागु डर सपनेसे

फिर थपकी ले सोऊँ माँ-बाप से

 

होटों से मुस्काई देख मिठाई

चारों और फिरू केह 'आज फिर लाई!'

बन गुरूजी मै सबको सिखाऊं

दादा-दादीसे कविताएँ बुलवाऊँ